Guide to Sugarcane Farming in North India

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COURIER CHARGES – ₹100

पुस्तक एवं लेखक के बारे में

“उत्तर भारत में गन्ना खेती की मार्गदर्शिका” शीर्षक यह पुस्तक 100 पृष्ठों में विस्तृत 18 अध्यायों का संकलन है, जिसमें उत्तर भारत में गन्ने की खेती के सभी व्यावहारिक पहलुओं का सरल एवं उपयोगी वर्णन किया गया है।

वर्ष 2025 के अंत में इस पुस्तक के संकलन के समय, गन्ना किसान एवं चीनी उद्योग दोनों अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे थे। एक समय अत्यंत लोकप्रिय रही गन्ना प्रजाति Co 0238 लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रति संवेदनशील हो गई, जिसके कारण गन्ने की उत्पादकता तथा चीनी परता (रिकवरी) दोनों में गिरावट आई। Co 0238 के क्षेत्रफल में कमी तथा अन्य प्रजातियों की अपेक्षाकृत कम उपज ने किसानों की आय को प्रभावित किया।

दूसरी ओर, कीटनाशक कंपनियों की आक्रामक विपणन रणनीतियों के कारण किसानों की कृषि-रसायनों पर होने वाली लागत में अपेक्षित कमी नहीं आ सकी। इसी प्रकार, चीनी मिलों को भी पेराई हेतु गन्ने की कम उपलब्धता के कारण समय से पूर्व बंद होने की समस्या का सामना करना पड़ा।

ऐसी परिस्थितियों में किसानों के लिए एक ऐसी व्यावहारिक मार्गदर्शिका की आवश्यकता अनुभव की गई, जो उन्हें खेती की मूलभूत कृषि पद्धतियों की ओर पुनः प्रेरित करे, उत्पादन लागत कम करने में सहायता प्रदान करे तथा कृषि-रसायनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं यंत्रीकरण के माध्यम से गन्ने की उपज बढ़ाने में मार्गदर्शन दे।

यह पुस्तक सरल हिंदी भाषा में चित्रों सहित लिखी गई है, जिससे किसान एवं गन्ना विकास विभाग के कर्मचारी इसे आसानी से समझ सकें। इस पुस्तक का प्रकाशन “नमो भगवते वासुदेवाय ट्रस्ट” द्वारा न्यूनतम लागत पर किया गया है। प्रत्येक पुस्तक की बिक्री से ₹20 ट्रस्ट को सामाजिक कल्याण गतिविधियों हेतु प्रदान किए जाएंगे। पुस्तक की बिक्री से लेखक को किसी प्रकार का आर्थिक लाभ प्राप्त नहीं होगा।

लेखक पद्मश्री सम्मान से अलंकृत हैं तथा कृषक परिवार से संबंध रखते हैं। वे सदैव किसानों के कल्याण के प्रति समर्पित रहे हैं। एक गन्ना प्रजनक (ब्रीडर) के रूप में उन्होंने 24 गन्ना प्रजातियों के विकास एवं विमोचन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें Co 0238 एक ऐतिहासिक एवं अत्यंत लोकप्रिय प्रजाति के रूप में स्थापित हुई। इनके द्वारा विकसित अन्य प्रमुख प्रजातियों में Co 98014, Co 0118 तथा Co 05011 शामिल हैं।

अपने संपूर्ण व्यावसायिक जीवन में लेखक को अपने माता-पिता, परिवार, गुरुजनों, सहकर्मियों तथा किसान समुदाय का निरंतर सहयोग एवं प्रेरणा प्राप्त हुई। इस सहयोग ने गन्ना कृषि के प्रति उनकी समझ और संवेदनशीलता को और अधिक समृद्ध किया।

समाज के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने तथा सार्थक योगदान देने की भावना से प्रेरित होकर लेखक ने पिछले 40 वर्षों के अपने अनुभव, ज्ञान एवं व्यावहारिक सीख को इस पुस्तक के माध्यम से संकलित किया है।

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